बिटकॉइन क्या है।| What is Bitcoin-theecofinance.com

संतोशी ने 31 अक्टूबर 2008 को www.metzdowd.com पर एक घोषणा की, “मैं एक नए इलेक्ट्रॉनिक कैश सिस्टम पर काम कर रहा हुँ, जो पूरी तरह से पियर-टू-पियर है जिसमें कोई विश्वसनीय तीसरा पक्ष नहीं है।”

Bitcoin Kya Hota Hai | What is Bitcoin in Hindi

संतोशी ने 31 अक्टूबर 2008 को www.metzdowd.com पर एक घोषणा की, “मैं एक नए इलेक्ट्रॉनिक कैश सिस्टम पर काम कर रहा हुँ, जो पूरी तरह से पियर-टू-पियर है जिसमें कोई विश्वसनीय तीसरा पक्ष नहीं है।”

इसका श्वेत पत्र ( श्वेत पत्र:- थ्योरी में किसे कांसेप्ट का पूरी तरह छप जाना) www.bitcoin.org पर प्रकाशित किया गया जिसका शीर्षक था; “Bitcoin: A Peer-to-Peer Electronic Cash System.”

क्रिप्टो करेंसी क्या है | What is Cryptocurrency

हालांकि क्रिप्टो करेंसी का पूरा का पूरा कांसेप्ट बिटकॉइन से लिया गया है, फिर भी बिटकॉइन क्रिप्टो करेंसी का पर्यायवाची नहीं है; बल्कि क्रिप्टो करेंसी का एक प्रकार है।जिस प्रकार हम Toothpaste मतलब Colgate, Photo copy मतलब Xerox, Adhesive मतलब Fevicol, Adhesive Bandage मतलब Band Aids, Vacuum Flask मतलब Thermos, तथा Search engine मतलब google समझते हैं उसी तरह भ्रम वश लोग क्रिप्टो करेंसी मतलब बिटकॉइन समझते हैं। जबकि अब तक बिटकॉइन के अलावा 7800 से भी ज्यादा क्रिप्टो करेंसी अस्तित्व में आ चुकी हैं।

जैसे कि आप पहले ही जान चुके हैं, क्रिप्टो करेंसी के सभी कॉन्सेप्ट बिटकॉइन से ही लिया गया है। क्रिप्टो करेंसी का शाब्दिक अर्थ होता है गोपनीय या कूट।

क्रिप्टो करेंसी, फिजिकल करेंसी (रुपया, यूरो, डॉलर, येन, दीनार etc) तथा डिजिटल करेंसी (डेबिट कार्ड, क्रेडिट कार्ड, पेटीएम, गूगल पे etc) में प्रयोग होने वाली करेंसी से अलग होती है।

क्रिप्टो करेंसी के अपने कुछ मानक होते हैं जिसे किसी भी करेंसी को क्रिप्टो होने के लिए पूरा करना होगा।

1> क्रिप्टो करेंसी एक वर्चुअल करेंसी है इसे आप हाथ में लेकर महसूस नहीं कर सकते हैं ना ही इसे स्टोर करके रखा जा सकता है इसकी वैल्यू सिर्फ कंप्यूटर में होती है कंप्यूटर के बिना इसका कोई अस्तित्व नहीं।

2> क्रिप्टो करेंसी एक डिसेंट्रलाइज (Decentralise) करेंसी है मतलब ये के फिजिकल करेंसी तथा डिजिटल करेंसी (पेटीएम, डेबिट कार्ड, क्रेडिट कार्ड)को एक सेंट्रल बॉडी द्वारा रेगुलेट किया जाता है। जैसे रुपया आरबीआई द्वारा तथा डॉलर को ओसीसी द्वारा रेगुलेट किया जाता है। लेकिन क्रिप्टो करेंसी को कोई भी ना ही रेगुलेट करता है और ना ही इस पर किसी का अधिकार होता है यहां तक कि बनाने वाले का भी इस पर कोई अधिकार नहीं होता। यदि एक लाइन में कहें तो यह सामाजिक करेंसी होती है। जिस पर किसी का भी अधिकार नहीं होता है, तथा सबका अधिकार होता है इसीलिए इसे लोकतांत्रिक करेंसी भी कहते हैं।

क्रिप्टो करेंसी कैसे काम करती है | How dose Work cryptocurrency

क्रिप्टो करेंसी क्रिप्टोग्राफी के नियमों के आधार पर बनाई और संचालित की जाती हैं बेसिकली इसमें सभी ट्रांजैक्शन का हिसाब रखने के लिए ब्लॉकचेन तकनीक का प्रयोग किया जाता है।

टॉप 5 क्रिप्टो करेंसी | Top 5 Cryptocurrency

अब तक पूरे विश्व में 7800 से भी ज्यादा क्रिप्टो करेंसी प्रचलन में आ चुकी है, जिन्हें सामूहिक रूप से Allcoin कहा जाता है। जिनमें से लगभग 2000 क्रिप्टो करेंसी का अस्तित्व समाप्त भी हो चुका है।

Bitcoin:- टॉप 5 क्रिप्टो करेंसी का मार्केट कैप सभी क्रिप्टो करेंसी का लगभग 80% है। अब तक सभी क्रिप्टो करेंसी का मार्केट वैल्यू भारतीय रुपए में लगभग 70 लाख करोड़ का है जिसमें से अकेले बिटकॉइन का मार्केट कैप 42 लाख करोड़ का है

Ethereum:- यह बिटकॉइन के बाद दूसरी सबसे प्रसिद्ध और मूल्यवान करेंसी है जिसका मार्केट कैप लगभग 10 लाख करोड़ का है।

Tether:- यह तीसरा सबसे प्रसिद्ध करेंसी है यह एक भुगतान केंद्रित करेंसी है।

Red Coin:- यह चौथी सबसे प्रसिद्ध करेंसी है इसका प्रयोग लोग टीप देने में करते हैं

Monero:- इसका प्रयोग dark Web में सबसे ज्यादा किया जाता है स्मगलर, कालाबाजारी तथा अवैध काम करने वालों के बीच सबसे ज्यादा यही करेंसी लोकप्रिय है।

Dogecoin:- यह हाल ही में काफी प्रसिद्ध हुई है यह एक मीम बेस्ड करेंसी है यह 2013 में सॉफ्टवेयर इंजीनियर विली और जेक्शन द्वारा मजाक के तौर पर बनाई गई थी इसलिए यह बिटकॉइन इतना सिक्योर नहीं है। एलोन मस्क के ट्वीट के कारण पिछले दिनों यह काफी चर्चा में रही।

बिटकॉइन कैसे काम करता है | How does Work Bitcoin

बिटकॉइन एक डिसेंट्रलाइज करेंसी है सतोशी ने बिटकॉइन को एक अल्टरनेटिव फाइनेंस सिस्टम जैसे इमेजिन किया था; जो सॉफ्टवेयर टेक्नोलॉजी पर आधारित होगा और थर्ड पार्टी के कंट्रोल से बाहर होगा।

बिटकॉइन काम कैसे करता है इसे समझने के लिए सबसे पहले यह समझना होगा कि करेंसी कैसे काम करती है सेकंड वर्ल्ड वॉर के बाद अमेरिका सबसे पावरफुल कंट्री बन गया था और बाकी सभी कंट्री को यूएस डॉलर के साथ अपने करेंसी को जोड़ना पड़ा और यूएस डॉलर सोने के भंडार से गारंटीड था चुकि सोने के भंडार सीमित है तो मार्केट में जितनी मांग बढ़ती सोने की वैल्यू उतनी ज्यादा बढ़ती जाती। बिटकॉइन का भी कॉन्सेप्ट इसी पर आधारित है, इसीलिए बिटकॉइन को डिजिटल गोल्ड भी कहा जाता है। सतोशी ने बिटकॉइन की संख्या को लिमिटेड रखा और वह संख्या है 21 मिलियन बिटकॉइन; जिस तरह से सोने की खदान से खुदाई की जाती है उसी तरह बिटकॉइन को भी बेहद टफ मैथमेटिकल इक्वेशन को सॉल्व करके पाया जा सकता है जिसे बिटकॉइन माइनिंग कहते हैं। (मैथमेटिकल इक्वेशन और माइनिंग क्या है आगे जानेंगे)।

3 जनवरी 2009 को पहले बिटकॉइन ब्लॉक की माइनिंग की गई, इस पहले ब्लॉक को जेनेसिस ब्लॉक कहा गया सारे बिटकॉइन ट्रांजैक्शन का एक पब्लिक खाता होता है जिसे लेजर (ledger) कहते हैं, और इस खाते की कॉपी हर एक सिस्टम पर होती है जो इस बिटकॉइन नेटवर्क का हिस्सा है और जो लोग यह सिस्टम चलाते हैं उन्हें माइनर कहते हैं यही माइनर ट्रांजैक्शन को वेरीफाई करते हैं।

मान लेते हैं A को B के खाते में एक बिटकॉइन भेजना है माइनर ही इस बात को कंफर्म करेंगे कि A के खाते में 1 बिटकॉइन है या नहीं; ट्रांजैक्शन कंफर्म करने के लिए माइनर को एक कॉम्प्लिकेटेड मैथमेटिकल इक्वेशंस सॉल्व करना होगा। हर एक बिटकॉइन ट्रांजैक्शन का एक वेरिएबल होता है, माइनर का काम है इस वेरिएबल को ढूंढ कर निकालना। इस इक्वेशन को सॉल्व करने के लिए बहुत ही कॉम्प्लेक्स और हाई प्रोसेसिंग कंप्यूटर की आवश्यकता होती है, और जब इक्वेशन सॉल्व हो जाता हैं तो इस नेटवर्क के सभी कंप्यूटर इसे वेरीफाई करते हैं और यह ट्रांजैक्शन चैन में ऐड हो जाता है। इस टेक्नोलॉजी को ब्लॉकचेन कहते हैं। और माइनर को इसके बदले सबसे कीमती चीज बिटकॉइन दिया जाता है इस सिस्टम को प्रूफ ऑफ वर्क कहते हैं माइनर को यह प्रूफ करना होता है कि उन्होंने इतना सारा कंप्यूटेशन वर्क किया है जिसके एवज में उन्हें रिवॉर्ड मिलता है।

जैसे-जैसे बिटकॉइन कि संख्या घटती जाएगी बिटकॉइन की माइनिंग उतना ही मुश्किल होता जाएगा और प्रूफ ऑफ वर्क के रूप में मिलने वाले रिवॉर्ड की मात्रा भी घटती जाएगी। अब तक 90% बिटकॉइन की माइनिंग की जा चुकी है अनुमान यह है कि 2040 तक आखरी बिटकॉइन की माइनिंग कर ली जाएगी। बिटकॉइन को BTC के रूप में लिखा जाता है खासकर उन प्लेटफॉर्मो पर जहां इसकी खरीद-फरोख्त की जाती है।

ब्लॉकचैन क्या होता है | What is Blockchain

ब्लॉकचेन एक डेटाबेस सिस्टम होता है इसमें सभी ट्रांजैक्शन के इंफॉर्मेशन एक ब्लॉक के रूप में उस चैन में ऐड होती रहती हैं, और इसे कोई भी एक्सेस कर देख सकता है ब्लॉकचेन की यही सबसे खास बात होती है जो क्रिप्टो करेंसी को लोकतांत्रिक और अत्यधिक पारदर्शी बनाता है। कोई भी ट्रांजैक्शन तब तक कंप्लीट नहीं हो सकता जब तक कम से कम 51% सिस्टम इससे वेरीफाई ना कर दें इसीलिए इसे हैक करना लगभग नेक्स्ट टू इंपॉसिबल है क्योंकि 51% सिस्टम जिन पर बिटकॉइन का एक्सेस है एक साथ हैक करना जिनकी लोकेशन अलग-अलग देशों में अलग-अलग जगहों पर है पॉसिबल नहीं है। ब्लॉकचेन की इसी पारदर्शिता और सिक्योरिटी रीजन से जल्द ही पूरे वर्ल्ड में ब्लॉकचेन तकनीक का उपयोग आपको मास लेवल पर देखने को मिलेगा।

ब्लॉकचेन तकनीक से किसी भी देश का चुनाव ब्लॉकचेन के माध्यम से एकदम पारदर्शी तरीके से कराया जा सकता है। तथा इसमें आप लाइव देख सकेंगे किस प्रत्याशी को कितना वोट पड़ा है और वोटर की आइडेंटिटी को भी गोपनीय रखा जा सकता है।

माइनिंग क्या है | What is Mining

किसी भी ट्रांजैक्शन को वेरीफाई करने के लिए एक कॉम्प्लिकेटेड मैथमेटिकल इक्वेशन को सॉल्व करना होता है और सबसे पहले सॉल्व करने वाले को प्रूफ ऑफ वर्क के रूप में मिलता है सबसे कीमती चीज बिटकॉइन और यह बिटकॉइन डिजिटल ट्रांजैक्शन की तरह ट्रांजैक्शन करने वालों को अपने जेब से नहीं देना होता; बल्कि जब आप कोई क्रिप्टो ट्रांजैक्शन वेरीफाई कर रहे हो तो दरअसल आप ऐसी जगह खुदाई कर रहे हो जहां क्रिप्टो करेंसी की खान है यदि आप ने सबसे पहले ट्रांजैक्शन वेरीफाई कर दिया तो इसका मतलब आप को खुदाई के दौरान क्रिप्टो करेंसी मिल गई। माइनर्स को माइनिंग करने के लिए एक हॉल से भी बड़े बड़े कंप्यूटर की आवस्यकता होती है जिसमे बहोत ज्यादा एनर्जी की जरूरत होती है। इस वेरिफिकेशन या नए ब्लॉग जोड़ने की प्रक्रिया को माइनिंग तथा ट्रांजैक्शन का वेरिफिकेशन करने वालों को माइनर्स कहते हैं

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